लक्ष्मी पूजन कब है

वैदिक पंचांग अनुसार इस साल दिवाली 24 अक्टूबर को मनाई जाएगी। 

भविष्य के अनुसार, कार्तिक प्रदोषे तु विशेषेण अमावस्या निशावर्धके।  

तस्यां सम्पूज्येत देवीं भोग मोक्ष प्रदायिनीम।।  

इसका अर्थ है कि जिस दिन मध्यरात्रि और प्रदोष काल में अमावस्या तिथि हो उसी दिन दिवाली पूजन करना शुभ फलदायी रहता है। 

फ्यूचर पंचांग के मुताबिक दिवाली के दिन प्रदोष काल शाम में 5 बजकर 42 मिनट से आरंभ हो रहा है। 

वहीं इस समय चर चौघड़िया रहेगा जो शाम में 7 बजकर 31 मिनट पर समाप्त हो जाएगा।  

इसलिए लक्ष्मी पूजन शाम 6 बजकर 54 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 30 मिनट से पहले आरंभ कर देना चाहिए। 

दिवाली का पूजन विशेष होता है। इसमें कुछ विशेष सामग्री भी होती हैं। 

वहीं पूजन में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मां लक्ष्मी की मूर्ति खंडित नहीं होनी चाहिए।